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GSTR-1 की टेबल समझें: कौन सा बिल कहाँ जाता है
GSTR-1 आपकी बिक्री का रिटर्न है। यह एक लंबी लिस्ट नहीं है: हर बिल किसी टेबल में जाता है, यह इस पर निर्भर करता है कि खरीदार कौन है, माल कहाँ जा रहा है और बिल कितना बड़ा है। टेबल सही होना ज़रूरी है, क्योंकि आपके खरीदारों का इनपुट टैक्स क्रेडिट उसी से बनता है जो आप रिपोर्ट करते हैं।
टेबल एक-एक करके
| टेबल | पोर्टल पर नाम | क्या जाता है |
|---|---|---|
| 4A, 4B, 6B, 6C | B2B, SEZ, Deemed exports | GSTIN वाले खरीदार को हर बिल, एक-एक करके, टैक्स रेट के हिसाब से बँटा हुआ। SEZ यूनिट और डीम्ड एक्सपोर्ट के बिलों पर उनका अपना इनवॉइस टाइप लगता है। |
| 5 | B2C (Large) | दूसरे राज्य के बिना-रजिस्ट्रेशन खरीदारों को ₹1 लाख से ऊपर की बिल वैल्यू वाले बिल, एक-एक करके। |
| 6A | Exports | एक्सपोर्ट बिल, IGST देकर या बिना दिए, पोर्ट कोड और शिपिंग बिल के साथ। |
| 7 | B2C (Others) | बिना-रजिस्ट्रेशन खरीदारों को बाकी सारी बिक्री: अपने राज्य का हर बिल, और दूसरे राज्य के ₹1 लाख तक के बिल। बिल-बिल नहीं: राज्य और रेट के हिसाब से जोड़कर। |
| 8 | Nil rated, exempted and non-GST | बिना GST वाली सप्लाई का टोटल, चार हिस्सों में: राज्य के अंदर या दूसरे राज्य को, रजिस्टर्ड या बिना-रजिस्ट्रेशन खरीदारों को। |
| 9B | क्रेडिट / डेबिट नोट | रजिस्टर्ड खरीदारों को नोट (CDNR), और बिना-रजिस्ट्रेशन खरीदारों को B2C Large या एक्सपोर्ट बिलों के खिलाफ़ नोट (CDNUR)। |
| 11A, 11B | मिले और एडजस्ट हुए एडवांस | वे एडवांस जिन पर आपने इनवॉइस से पहले GST दिया (ज़्यादातर सर्विस में), और इनवॉइस बनने पर उनका एडजस्टमेंट। |
| 12 | HSN-wise summary | हर HSN या SAC कोड और रेट का टोटल, दो हिस्सों में: B2B और B2C। |
| 13 | Documents issued | हर नंबर सीरीज़ के लिए: पहला नंबर, आख़िरी नंबर, कुल और कैंसल। |
B2C Large: ₹1 लाख का नियम
बिल B2C Large में तभी जाता है जब तीनों बातें सच हों: खरीदार का GSTIN नहीं है, प्लेस ऑफ़ सप्लाई दूसरे राज्य में है, और बिल वैल्यू (टैक्स समेत) सीमा से ऊपर है। सीमा अगस्त 2024 की रिटर्न अवधि से ₹1 लाख है (Notification 12/2024-Central Tax, 10 जुलाई 2024); उससे पहले ₹2.5 लाख थी।
उदाहरण। लुधियाना का एक ट्रेडर दिल्ली के बिना-रजिस्ट्रेशन खरीदार को बेचता है। ₹1,18,000 का बिल टेबल 5 में जाता है, बिल-बिल। उसी खरीदार को ₹94,400 का बिल टेबल 7 में जाता है, उसी रेट की दिल्ली की दूसरी बिक्री के साथ जोड़कर। पंजाब में ही बिना-रजिस्ट्रेशन खरीदार को ₹2,00,000 का बिल हमेशा टेबल 7 में जाता है, क्योंकि वह राज्य के अंदर की बिक्री है।
B2C Small लिस्ट नहीं, टोटल है
टेबल 7 में हर प्लेस ऑफ़ सप्लाई और रेट की एक लाइन देते हैं, जैसे "03-Punjab, 18%, टैक्सेबल वैल्यू ₹4,52,300"। टैक्स रेट से निकाला जाता है। छोटे B2C बिल के खिलाफ़ क्रेडिट नोट 9B में नहीं जाता: वह उसी राज्य और रेट के लिए उस महीने की टेबल 7 की रकम घटा देता है (रकम माइनस भी हो सकती है)।
क्रेडिट और डेबिट नोट
- रजिस्टर्ड खरीदार को (CDNR): नोट नंबर, तारीख, टाइप (C या D), नोट वैल्यू, रेट और टैक्सेबल वैल्यू, खरीदार के GSTIN के साथ।
- बिना-रजिस्ट्रेशन खरीदार को: सिर्फ़ तब जब ओरिजिनल बिल B2C Large या एक्सपोर्ट था (CDNUR, "UR type" B2CL, EXPWP या EXPWOP)। नहीं तो वह टेबल 7 एडजस्ट करता है।
- प्लेस ऑफ़ सप्लाई ओरिजिनल इनवॉइस से लिया जाता है।
जारी डॉक्यूमेंट (टेबल 13)
बहुत लोग यह टेबल खाली छोड़ देते हैं, पर यह रिटर्न का हिस्सा है। हर सीरीज़ के लिए उस अवधि में इस्तेमाल हुआ पहला और आख़िरी नंबर, कुल, और कितने कैंसल हुए, लिखें। इनवॉइस, क्रेडिट नोट, डेबिट नोट, रिसीट वाउचर, रिफ़ंड वाउचर, पेमेंट वाउचर (रिवर्स चार्ज), बिना-रजिस्ट्रेशन व्यक्तियों से खरीद के सेल्फ़ इनवॉइस, और जॉब वर्क या अप्रूवल पर सप्लाई के डिलीवरी चालान, सबकी अपनी-अपनी लाइन होती है।
टूल कैसे तय करता है
होम पेज पर GSTR-1 मेकर ठीक इन्हीं नियमों पर चलता है। वह खरीदार का GSTIN जाँचता है (चेक डिजिट गलत हो तो बिल B2C माना जाता है), प्लेस ऑफ़ सप्लाई बिल से (या खरीदार के राज्य से) लेता है, SEZ, डीम्ड एक्सपोर्ट और एक्सपोर्ट बिलों के लिए आपका चुना ई-इनवॉइस सप्लाई टाइप इस्तेमाल करता है, और हर क्रेडिट नोट का ओरिजिनल इनवॉइस खोजता है।